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Pind Daan

Pind Daan or post death rituals history in Bodhgaya-Legend of Gaya ji pind daan: Gaya finds mention in the great epics, Ramayana and Mahabharata.

Narayan Nagbali Shradh

Narayanbali should be performed. Ideal locations for having the Shraadh or Narayan Nagbali Poojan conducted are Gaya (Bihar) for Father.

Pitra Dosh Nivaran

Pitra Dosh Nivaran is one of the biggest obstacle on the path to siddhi. Success is almost not possibleif one has pitra dosh in ones life.

Tripindi Shraddh

Tripindi Shradh removes the entire bad omen that one has experienced in past. Tripindi Shradh liberates the souls of deceased and thence bringing peace in life of family members.

Sharaddh Karma

The importance given in India to the birth of sons reflects the need to ensure that there will be a male descendant to perform the shraddha ceremony after one’s death.

Other Rituals

Holy Voyages offers of Shradh and Pind Daan packages in the peak Pitru Paksha season for the performance of Shradh and Pind Daan rituals in Gaya ji. This package includes Panda and other Shradh and Pind Daan.

Pind Daan

पिंडदान करने की विधि तथा सामग्री से जुड़ी सारी जानकारी

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की बहुत मान्यता है। हर साल कुछ 13 दिनों की अवधि के लिए सभी लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध आदि करते हैं। हर साल सितंबर महीने में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। चलिए फिर जानते हैं कि इस साल यानी 2022 में पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहे हैं, श्राद्ध करने की तिथि क्या होगी, इसका महत्व क्या है आदि।
● श्राद्ध क्या होता है? श्राद्ध के नाम से ही पता चलता है कि किसी के प्रति श्रद्धा भाव को प्रकट करना। यही कारण है कि जो भी लोग मृत हो गए हैं, उनका श्राद्ध किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माता पार्वती और शिव को श्रद्धा विश्वास रुपिणौ है।
● पितृ पक्ष का इतिहास क्या है? अब जब हिंदू धर्म के लोग हर साल पितरों को भोजन खिलाते हैं, तो ऐसे में ये जानना सभी के लिए बेहद आवश्यक हो जाता है कि आखिर इसका इतिहास क्या है। कैसे इसकी शुरुआत हुई। चलिए फिर देखते हैं इसका इतिहास। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। माना जाता है कि जब राजा कर्ण की मृत्यु हुई तो उन्हें स्वर्ग में जगह दी गई है। वहां पर उन्हें खाने पीने को भोजन की जगह सोना चांदी दिया गया। अब राजा कर्ण उसे खा तो सकते नहीं थे। वो बड़ी ही विकट स्थिति में थे। फिर उन्हें थक हारकर स्वर्ग के स्वामी इंद्र से यह प्रश्न पूछ ही लिया कि आखिर उन्हें खाने पीने के लिए भोजन की जगह सोना चांदी क्यों दिया जा रहा है। इस बात का जवाब देते हुए राजा इंद्र ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में भले ही सबको खूब सोना चांदी दान किया हो और दानवीर कर्ण नाम पाया हो, लेकिन उन्होंने कभी अपने पूर्वजों को भोजन नहीं खिलाया। यह सुनकर कर्ण ने इंद्र से बोला कि उन्हें अपने पूर्वजों का कोई भी बोध नहीं था। इसके बाद कर्ण को वापस 15 दिनों के लिए धरती पर भेज दिया जाता है। कर्ण इस बात से सहमत हो जाते हैं और धरती पर आकर 15 दिनों की अवधि के दौरान अपने पितरों को भोजन आदि खिलाते हैं। बस इसी 15 दिन की अवधि को अब हम सभी पितृ पक्ष के तौर पर जानते हैं और इन दिनों में अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।
● 2024 में श्राद्ध पक्ष की तिथि कब से कब तक की होगी?
भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से अमावस्या तक पितृ पक्ष रहते हैं. पितृ पक्ष 17 सितंबर 2024 से शुरू हो रहे हैं. इसका समापन 2 अक्टूबर 2024 को होगा.

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